Tuesday, March 5, 2024
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singrauli news: कोयला की कमी को पूरा करने में सिंगरौली की भूमिका ,वर्ष 2021-22 में 2709.77 करोड़ रुपये की आमदनी

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singrauli news: सिंगरौली। देश की ऊर्जाजन्य जरूरतों की पूर्ति के लिये महत्वपूर्ण और आर्थिक विकास की धुरी माना जाने वाला विद्युत क्षेत्र कोयले की आपूर्ति जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार गर्मी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक तौर पर बिजली की मांग बहुत बढऩे वाली है। बिजली उत्पादन कोयले की उपलब्धता पर निर्भर करता है क्योंकि अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों से बिजली आपूर्ति में फिलहाल 10 फीसदी मदद भी नहीं मिल पा रही है।

singrauli news: देश में बिजली की मांग के करीब 70 फीसदी हिस्से का उत्पादन सिर्फ कोयले पर निर्भर है। आयातित कोयला घरेलू कोयले के मुकाबले बहुत अधिक महंगा होने से इन गर्मियों में बिजली वितरण कंपनियों को बिजली काफी महंगी पडऩे वाली है। इसका एक बड़ा कारण केंद्र सरकार का वो फैसला है जिसमें वितरण कंपनियां बिजली के दाम बढ़ाने को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र कर दी गई हैं। ऐसे में सिंगरौली का देश के विद्युत क्षेत्र और अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश के विपुल खनिज भण्डार राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास की प्रमुख कड़ी है। कोयले के उत्पादन में मध्यप्रदेश का देश में चौथा स्थान है। जहां देश के 7.8 प्रतिशत कोयला भंडार है और भारत के कुल कोयला उत्पादन का 13.6प्रतिशत पैदा करता है। हाल में ही राज्य सभा में कोयला मंत्रालय द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक देश भर में सरकारी और निजी क्षेत्रों को मिलकर कुल 488 कोयला का खदान है जिसमें मध्यप्रदेश में स्थित कोयला खदानों की संख्या 79 है।  
सरकार को मिल रहा हजारो करोड़ो रुपए का राजस्व
मध्यप्रदेश में वर्ष 2022 के दौरान 137.953 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ जबकि वर्ष 2021 के दौरान 132.531 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ था जिससे प्रदेश को हजारों करोड़ का राजस्व मिला। कोयले की खनन से मिलने वाले रॉयल्टी के तौर पर वर्ष 2020-21 में मध्यप्रदेश सरकार को 3199.42 करोड़ मिला था जबकि वर्ष 2021-22 में 2709.77 करोड़ रुपये की आमदनी हुई।singrauli news:
कई राज्यो में सिंगरौली बिजली का कर रहा आपूर्ति
सिंगरौली जिले के आसपास कोयला आधारित कुल नौ पावर प्लांट  हैं। जिनकी कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 21,270 मेगावाट है। इस क्षमता का आधे से अधिक 11180 मेगावाट अपेक्षाकृत नया है और इसे पिछले 10 वर्षों में जोड़ा गया है। अधिक क्षमता वृद्धि के कारण इस क्षेत्र में अत्यधिक मात्रा में कोयले की खपत हुई। यही वजह है कि सिंगरौली को उर्जाधानी कहा जाता है जो सिर्फ  मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों के बिजली की जरूरतों को पूरा करता है। खदानों से निकलने वाले कोयले की आपूर्ति ताप विद्युत केंद्रों  के अलावा विभिन्न औद्योगिक केंद्रों को भी की जाती है।
सिंगरौली लक्ष्य से अधिक राजस्व अर्जित कर रहा अव्वल
कोयले की खनन की रॉयल्टी में सिंगरौली जिला ने लक्ष्य से अधिक राजस्व अर्जित कर मध्यप्रदेश में अव्वल रहा। पिछले वर्ष भी सिंगरौली खनिज राजस्व वसूली में प्रदेश में शिखर पर था। वर्ष 2023 के लिए निर्धारित राजस्व वसूली 2588.00 करोड़ के विरूद्ध 2686.52 करोड़ रूपये की वसूली कर प्रदेश में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। रॉयल्टी से मिले इस रकम का उपयोग राज्य सरकार लोकहित से जुड़े कार्यक्रमों जैसे स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सडक़ और अन्य मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने में करती ह. singrauli news:
आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान
भारत वर्तमान में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और देश का कोयला और खदान क्षेत्र वर्तमान आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। निवेश के निरंतर कार्यक्रम और आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग के बदौलत चालू वित्त वर्ष 2022-23 ;फरवरी 2023 तक में भारत का कोयला उत्पादन 785.24 मिलियन टन है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान लगभग 681.98 मिलियन टन की तुलना में लगभग 15.14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
क्षेत्रों का हो रहा विकास
केंद्र सरकार को वर्ष 2030 तक लगभग पांच सौ खदानों की नीलामी से डेढ करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की आशा है। वहीं स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कौशल विकास के साथ-साथ जरूरतमंद महिलाओं  के लिए महिला उद्यमी बहुउद्देशीय सहकारी समिति का संचालन से क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो रहा है। पूंजी का प्रवाह सिंगरौली क्षेत्र में होने  कारण आसपास के क्षेत्र का विकास हो रहा है। 

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