singrauli news: सिंगरौली। नगर पालिक निगम सिंगरौली ( Municipal Corporation Singrauli ) के वार्ड क्रमांक 42 में बन रही नाली में भ्रष्टाचार के छेद ही छेद दिखाई दे रहे हैं। कहने को तो जांच हुई है, लेकिन यह जांच सिर्फ कोरमपूर्ति तक सिमट कर रह गई है। बताया जाता है, कि मंगल पैलेस सडक़ ( That Mangal Palace Road ) मार्ग में तकरीबन 680 मीटर नाली में गुणवत्ता के साथ स्टेक्चर को पूरी तरीके से दरकिनार संविदाकार ने किया है। गौरतलब हो कि लंबे अर्से से मंगल पैलेस सडक़ ( That Mangal Palace Road ) मार्ग को सडक़ व नाली की ( road and drain ) मांग चल रही थी। काफी समय टेंडर प्रक्रिया में बीत गया।
singrauli news: टेंडर प्रक्रिया के बाद भी संविदाकार ने काफी समय व्यतीत किया। सडक़ तो नही बन पाई है लेकिन नाली का निर्माण कार्य तकरीबन हफ्ते भर से चल रहा है। जिस तरीके से नाली का निर्माण कार्य संविदाकार के द्वारा कराया गया है और कराया जा रहा है उसे अगर इंजीनियर विधिवत जांच करे और सत्यता पर खरा उतरे तो नाली निर्माण को डिफाल्ट कर देगा। लेकिन यह नगर निगम है। यहां हर कार्य कमीशन के बल पर चलता है। यही वजह है कि नगर निगम के निर्माण कार्यो में कोई गुणवता की गारंटी नही होती है। जिसके चलते संविदकार भी अपनी कमाई व कमीशन को देखते हुए निर्माण कार्य कराते हैं। लेकिन इस निर्माण कार्य में वार्ड की आम जनता पिसती है।
जिस तरीके से वार्ड क्रमांक 42 के मंगलम पैलेस सडक़ मार्ग में नाली का निर्माण कार्य एम एच इनफ्राटेक्चर के द्वारा कराया गया है उसके क्वालिटी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि नगर निगम की टीम एक दिन निरीक्षण करने पहुंची हुई थी लेकिन एक जगह पर खड़े होकर पूरे नाली का वैलूवेशन कर लिया गया। इसी से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नाली की गुणवत्ता कितना सही होगी और कितने दिन टिकेगी।

क्वालिटी को नही किया मेनटेन
सिविल के कार्य कैसे होते हैं यह इंजीनियर तय करता है। इंजीनियर के निरीक्षण व बताएनुसा क्वालिटी को मेनटेन किया जाता है। लेकिन मंगल पैलेस सडक़ मार्ग में बनाई गई नाली को नॉन टेक्रिकल ठेकेदार के सुपरवाईजरों के द्वारा कराया गया है। जिस नाली निर्माण में किस अनुपात में सरिया,गिट्टी,रेता व सीमेंट का क्या अनुपात होना चाहिए उसका पालन नही किया गया है। तो वहीं नाली सीधी होनी चाहिए जिससे पानी का बहाव अवरुद्ध न हो लेकिन नॉन टेक्रिकल कर्मचारियों के द्वारा नाली को सीधा न करके जिगजैक बनाया गया है.
नाली निर्माण की स्टीमेट का नही हुआ पालन
बताया जाता है कि नाली निर्माण में नगर निगम के द्वारा जो स्टीमेट दिया गया था उसे स्टीमेट के आधार पर नाली निर्माण नही कराया गया है। बताया जाता है कि ऐसे लोकल सरिया का उपयोग ( use of local rebar ) किया गया है। जैसे ही गिट़्टी,सीमेंट और रेत का मिश्रण करके नाली तैयार की जा रही थी तो लोकल सरिया की वजह से नाली झूक रही है। इसी से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नाली निर्माण में संविदाकार के द्वारा जमकर गुणवत्ता की अनदेखी की है।
क्या है गारंटी,झेल लेगी बरसात
सूत्रों की माने तो लगभग 18 से 20 लाख रुपए की लागत से नाली का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। लेकिन नगर निगम के बजट पर संविदाकार से लेकर अधिकारी-कर्मचारी कमीशन के लालच में गारंटी को दरकिनार कर रहे हैं। क्या जो गारंटी की रुपरेखा बनी है उस रुपरेखा के आधार पर क्या एक वर्ष भी यह नाली बरसाती पानी को झेल पाएगी। इस पर भी संशय बना हुआ है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कमीशन के लालच में कुम्भकरणीय निद्रा में सो रहे हैं. singrauli news