Wednesday, February 1, 2023
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PM आवास योजना घोटाला, 1 माह से मोदी के दफ्तर में धूल फांक रही फाइल

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singrauli big scam in PM housing scheme officials are not taking care PM Awas Yojana scam, file gathering dust in Modi’s office since 1 month

PM : मध्यप्रदेश के सतना में पीएम आवास योजना घोटाला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि इसके बाद अब सिंगरौली जिले में पीएम आवास योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है यहां अधिकारी अधीनस्थ कर्मचारियों पर इस भ्रष्टाचार का ठीकरा फोड़ रहे हैं और जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं

PM : सिंगरौली 29 अक्टूबर। प्रधानमंत्री आवास योजना की आंकड़ेबाजी का पर्दाफास हुआ है। देवसर जनपद के अधिकारी एसी रूम में बैठकर कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ को फर्जी आंकड़े दे रहे थे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ग्राम पंचायत खंधौली है।

गौरतलब हो कि जिले भर में पीएम आवास योजना में व्यापक पैमाने पर खेला हुआ है। चितरंगी जनपद पंचायत क्षेत्र के बीछी ग्राम पंचायत भी है। जहां दो दर्जन हितग्राहियों का नाम बदलकर तत्कालीन रोजगार सहायक ने व्यापक पैमाने पर खेला करते हुए अपने परिजनों के नाम से भी दूसरे पंचायत में हितग्राहियों का नाम हेरफेर कर लाभ उठा लिया. PM

मामला कई महीनों से जिला पंचायत सीईओ के दफ्तर में जांच फाइल धूल खा रही है यह एक बानगी है। खंधौली ग्राम पंचायत एक और सबसे बड़ा उदाहरण आया। जहां दर्जनों प्रधानमंत्री आवास कागजों में ही बनाकर राशि आहरित कर ली गयी। वहीं ऐसे हितग्राहियों का नाम शामिल है जिनका पहले सूची में नाम नहीं था. PM

सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल की जानकारी तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ बीके सिंह सहित पंचायत सचिव, पीसीओ एवं ब्लाक क्वार्डिनेटर, प्रभारी पीएम आवास को भी भली-भांति थी, किन्तु आर्थिक तंत्र के आगे सब कुछ नजरअंदाज कर प्रत्येक माह कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ के द्वारा पीएम आवास संबंधी आयोजित समीक्षा बैठक में फर्जी आंकड़ेबाजी कर रहे थे. PM

बता दें कि जब मामले का खुलासा होने लगा तो जनपद देवसर के अधिकारी, कर्मचारियों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए रोजगार सहायक प्रदीप मिश्रा पर सारा आरोप मढ़ दिया। जबकि सूत्र बताते हैं कि पीएम आवास के पूर्ण होने की जानकारी अकेले रोजगार सहायक नहीं देता है। पंचायत के उपयंत्री, सचिव, पीसीओ की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

सवाल उठ रहा है कि जब आवास नहीं बने थे तो तीन दर्जन से अधिक आवासों के निर्माण कार्य कैसे पूरे हो गये। आवासों के ले आउट कराने का कार्य संबंधित पंचायत के उपयंत्री की होती है। फिर इतने व्यापक पैमाने पर आवास कागजों में तैयार हो गये उपयंत्री कहां था। वहीं समय-समय पर उपयंत्री को आवास का निरीक्षण एवं हितग्राहियों से संपर्क कर निर्माण संबंधी सही सुझाव देना है. PM

ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि जनपद के अधिकारी एसी रूम में ही बैठकर सब काम कर रहे थे या फिर इस आवास के घोटाले में उपयंत्री, पंचायत सचिव, पीसीओ के भी संलिप्त होने की बू आ रही है। फिलहाल प्रधानमंत्री आवास योजना खंधौली पंचायत जहां इन दिनों चर्चाओं में है। वहीं इस घोटाले में अकेले रोजगार सहायक पर आरोप मढ़ देना कहीं न कहीं जांच अधिकारी के कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। अपने मातहतों को बचाने के लिए रोजगार सहायक को असली गुनाहगार बताकर अन्य अमले को अभयदान देने का हर संभव प्रयास किया है।

पीसीओ भी नहीं किया पंचायत का भ्रमण

गौरतलब हो कि प्रधानमंत्री आवास योजना में संविदा रोजगार सहायक की उतनी जबावदेही नहीं होती जितनी पंचायत सचिव, पीसीओ एवं उपयंत्री तथा जनपद सीईओ की होती है। किन्तु सूत्र बताते हैं कि पीसीओ भी पंचायत का भ्रमण नहीं किया। जबकि पीसीओ की जिम्मेदारी है कि वह पंचायत में एक-एक सभी निर्मित आवासों का निरीक्षण एवं कार्य के प्रगति का अवलोकन कर हितग्राहियों से संपर्क कर मासिक कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ की समीक्षा बैठक में पूर्ण किये गये आवासों की जानकारी दें. PM

सवाल उठाया जा रहा है कि हर महीने कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ के द्वारा आवास की समीक्षा  की जा रही थी। ऐसे में क्या सब कुछ आंकड़े की बाजीगरी थी और पीसीओ भी दफ्तर में बैठकर फर्जी जानकारियां वरिष्ठ अधिकारियों को दे रहा था. PM

जीआरएस को अकेले अपराधी बनाना चर्चा का विषय

खंधौली ग्राम पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक को पीएम आवास के घोटाले में अकेले दोषी ठहराया जा रहा है। प्रभारी जनपद सीईओ ने अपने अन्य मातहतों पर दरियादिली दिखाते हुए उन्हें अभयदान दे दिया है। ऐसे में जांच प्रतिवेदन व जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली भी शक के घेरे में है। 

जनपद देवसर में ही चर्चा है कि पीएम आवास के घोटाले में अकेले जीआरएस अपराधी नहीं है, यदि निष्पक्ष एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच हो तो जीआरएस के अलावास पंचायत सचिव, उपयंत्री, पीसीओ एवं तत्कालीन जनपद के सीईओ भी अपराधी बन सकते हैं। इनकी जबावदेही रोजगार सहायक से ज्यादा है, किन्तु मामले को इधर-उधर कराने के चक्कर में अकेले रोजगार सहायक को बलि का बकरा बना दिया जा रहा है। अब पुलिस के विवेचना पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. PM

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