Wednesday, February 14, 2024
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Sanitary Pads: जानलेवा भी हो सकता है सैनिटरी पैड, नई स्टडी में दावा- मिला कैंसर पैदा करने वाले रसायन

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Sanitary Pads: व्यापक पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले सेनेटरी नैपकिन (sanitary napkin) को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत(bharat) में सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल किसी महिला के लिए जानलेवा बन सकता है। इससे बांझपन (baanjhpan) की समस्या भी आ सकती है.

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Sanitary Pads: बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले सैनिटरी नैपकिन (sanitary napkin) को लेकर एक स्टडी में अहम खुलासा किया गया है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि भारत में व्यापक रूप से उपलब्ध सैनिटरी पैड में कैंसर पैदा करने वाले रसायन पाए गए हैं। यह एक चौंकाने वाला दावा अब लोगों की चिंता बढ़ा दी है. अब भारत में हर चार में से लगभग तीन किशोर महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं।

एनवायरनमेंटल एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर और जांचकर्ताओं में से एक डॉ. अमित ने कहा कि आम तौर पर उपलब्ध सैनिटरी उत्पादों में कई हानिकारक रसायनों का मिलना चौंकाने वाला है। इसमें कार्सिनोजेन्स, रिप्रोडक्टिव टॉक्सिन्स, एंडोक्राइन डिसरप्टर्स और एलर्जेंस जैसे जहरीले रसायन शामिल हैं। दरअसल स्वीडिश एनजीओ इंटरनेशनल पॉल्युटेंट्स इलिमिनेशन नेटवर्क (IPEN) ने लोकल संस्था टॉक्सिक लिंक के साथ मिलकर हिंदुस्तान में बनते सैनिटरी पैड्स की जांच ने पाया है कि इसमें जहर होता है वह भी कोई साधारण शहर नहीं बल्कि कैंसर पैदा करने वाला जहर. इस रिपोर्ट के बाद अब महिलाओं सहित पुरुषों की भी चिंता बढ़ा दी है. Sanitary Pads

‘रैप्ड इन सिक्रेसी’ नाम से जारी इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केवल गली मोहल्लों में बनने वाले ही नहीं बल्कि ब्रांडेड कंपनियों की सेनेटरी पैड में भी यह जहर मिला है जबकि इन ब्रांडेड सेनेटरी पैड का विज्ञापन बड़े बड़े चैनलों में प्रचार किया जाता है जो दावा करती हैं उनका पेड़ लेने से बच्ची औरत ना केवल आरामदायक महसूस करती हैं बल्कि वह दर्द को भी भूल जाती है इसके बाद हुए या कहीं आना जाना हो या फिर किसी भी तरह का स्पोर्ट्स ही क्यों ना हो वहां भी किसी भी तरह की समस्या नहीं होती है. कंपनियों का दावा है कि यह पैड्स खून को मजबूती से सोखने के साथ-साथ ये पैड पीरियड्स का सारा दर्द हर लेंगे. Sanitary Pads

सभी नमूनों में थैलेट और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक मिले

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एनजीओ द्वारा किए गए अध्ययन ने पूरे भारत में उपलब्ध 10 ब्रांडों के पैड (जैविक और अकार्बनिक सहित) का परीक्षण किया और सभी नमूनों में थैलेट और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की मौजूदगी पाई गई। दोनों प्रदूषक रसायनों में कैंसर कोशिकाएं बनाने की क्षमता होती है। टॉक्सिक्स लिंक ने पाया कि विश्लेषण किए गए कुछ पैड में उनकी सांद्रता यूरोपीय विनियमन मानक से तीन गुना अधिक थी. Sanitary Pads

इस मामले में सबसे चिंताजनक 

बता दें कि सैनिटरी पैड के माध्यम से हानिकारक रसायनों के शरीर द्वारा अवशोषित होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। इस अध्ययन का हिस्सा रहीं टॉक्सिक्स लिंक की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आकांक्षा मेहरोत्रा ने कहा कि एक श्लेष्मा झिल्ली के रूप में योनि, त्वचा की तुलना में अधिक रसायनों को स्रावित और अवशोषित कर सकती है. Sanitary Pads

निर्माण और उपयोग पर भारत में कड़े मापदंड नहीं

सुरक्षा के स्वच्छ साधनों को अपनाने की बजाय भारतीय महिलाओं को सैनिटरी पैड का उपयोग करने के लिए कहा जा रहा है। कार्सिनोजेन्स सहित हानिकारक रसायनों की उपस्थिति महिलाओं के विश्वास के लिए एक बड़ा झटका है। यूरोपीय देशों में सख्त नियम हैं लेकिन सैनिटरी पैड की संरचना, निर्माण और उपयोग पर भारत में कड़े मापदंड नहीं हैं। हालांकि ये बीआईएस मानकों के अधीन हैं, लेकिन इनमें रसायनों पर कुछ भी विशिष्ट निर्देश नहीं है. Sanitary Pads

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