Wednesday, February 1, 2023
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Country में सबसे पहले महाकाल मंदिर मे मनाई गई दीपावली,देखें भस्म और फुलझड़ी महाआरती,लगा 56 भोग देखें video

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First in the country, Deepawali was celebrated in Mahakal temple, see Bhasma and sparkling Maha Aarti, took 56 enjoyment, watch video

First in the country : बाबा महाकाल को लगाया 56 भोग फिर फुलझड़ी से की गई महाआरती

First in the country उज्जैन। देशभर में आज दिवाली (दीपावली) की धूम है। विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योतिलिंर्गों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी परंपरा के अनुसार दिवाली मनाई गई। सुबह 4 बजे भस्म आरती के दौरान महाकाल की विशेष पूजा और आरती के बाद फुलझड़ी जलाकर त्यौहार मनाया गया। वही मतांतर के चलते आज सुबह चतुर्दशी व शाम को अमावस्या तिथि है, जिसके चलते राजा और प्रजा एक ही दिन दीपावली मनाएंगे।

मान्यताओं के अनुसार, सभी त्योहार सबसे पहले महाकाल के आंगन में ही मनाए जाते हैं. यही वजह है कि रोशनी का सबसे बड़ा पर्व दिवाली भी बाबा महाकाल के आंगन में सुबह की भस्मार्ती के दौरान मनाया गया।

इससे पहले बाबा महाकाल को चंदन का उबटन, चमेली का तेल लगाकर उनका श्रृंगार किया गया।

भस्म आरती में बाबा महाकाल का विशेष पंचामृत अभिषेक पूजन किया गया।

जिसके बाद गर्भ गृह में शिवलिंग के पास पंडित पुजारी ने फुलझड़ियां जलाकर भगवान शिव के साथ दीपावली पर्व मनाया।

इसके बाद पुजारी/पुरोहित परिवार की महिलाओं ने विशेष दिव्य आरती की और बाबा को 56 भोग अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया। बता दें कि बाबा महाकाल का 56 भोग पुजारी नगर से मिलने वाली अन्न सामग्री से ही तैयार किया जाता है।

दिवाली के मौके पर महाकाल मंदिर में आकर्षक लाइटें और रंगोली सज्जा भी की गई है। कार्तिकेय मंडपम, गणेश मंडपम और गर्भगृह को भी दिवाली के मौके पर शानदार तरीके से सजाया गया है।

मंदिर के पुजारी पंडित प्रदीप गुरु ने बताया कि मंदिर मे पुजारी देवेंद्र शर्मा, कमल पुजारी के मार्गदर्शन में अन्नकूट का भोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की गई।

मंदिर मे अन्नकूट 56 भोग की परंपरा वर्षो पुरानी है, वह भी निभाई गई, साथ ही विभिन्न प्रकार की औषधि, रस और सुगंधित द्रव्य भगवान को लगाए गए।

इसके बाद भगवान का भांग से श्रृंगार किया गया। देर रात महाकाल मंदिर में पण्डे-पुजारियों ने मंदिर परिसर में पटाखे फोड़े और आतिशबाजी की। सुबह फुलझड़ी जलाकर बाबा के साथ पर्व की शुरूआत की गई।

महाकाल मंदिर में हिंदू धर्म के सभी त्यौहार एक दिन पहले मनाए जाते हैं.पं.महेश पुजारी ने बताया कि महाकाल मंदिर में परंपरा अनुसार हिंदू धर्म के सभी प्रमुख त्योहार एक दिन पहले मनाए जाते हैं।

मान्यता है कि भगवान महाकाल अवंतिका के राजा हैं, इसलिए त्योहार की शुरूआत राजा के आंगन से होती है। इसके बाद प्रजा उत्सव मनाती है।

अनादिकाल से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार इस बार भी दोनो तिथियो के एक होने पर अलसुबह यह उत्सव मनाया गया।

इस दिन से सर्दी की शुरूआत भी मानी जाती है, इसलिए भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान कराने का सिलसिला भी शुरू हो गया, जो फाल्गुन पूर्णिमा तक चलेगा।

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